Welcome To Bhagvandeen Arykanya PG Mahavidyalay
वर्तमान में भारत वर्ष ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण विश्व के समक्ष सबसे भयंकर चुनौती यही है कि किस प्रकार मनुष्य
को मनुष्य बनाया जाये। स्वामी विवेकानन्द के शब्दों में ''आप उस व्यक्ति को शिक्षित मानते हैं जिसने कुछ परीक्षाएँ उत्तीर्ण
कर ली हों तथा जो अच्छे भाषण दे सकता हो। परन्तु वास्तविकता यह है कि जो शिक्षा जनसाधारण को जीवन के लिए तैयार
नहीं करती, जो चरित्र निर्माण नहीं करती, जो समाज सेवा की भावना विकसित नहीं करती तथा जो सिंह जैसा साहस पैदा
नहीं कर सकती वह शिक्षा हो ही नहीं सकती, ऐसी शिक्षा से क्या लाभ ? वह भी कोई शिक्षा है ?
हमें ऐसी शिक्षा
चाहिए जिससे चरित्र का निर्माण हो, मन का बल बढ़े, बुद्धि का विकास हो और व्यक्ति स्वावलम्बी बने। अतः मेरे विचार से
शिक्षा चरित्र निर्माण करने वाली होनी चाहिए। यदि प्रत्येक नागरिक चरित्रवान, विवेकवान और गुणवान है, तो समाज व राष्ट्र
दोनों ही उन्नत होगें। तो आइये हम सभी मिलकर आजादी के अमृत महोत्सव में एक नवीन संकल्प के पुनीत उद्घोष के साथ
वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2023-24 का आगाज़ करें.